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1 साल 1952 था। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव पिपरी कलां में हर सुबह मुर्गे की बांग से होती थी। वहीं रहते थे हमारे दादा श्यामलाल, और पास के ही गांव में थीं हमारी दादी गुंजन देवी। दादा का बचपन श्यामलाल जी का बचपन बेहद सादा, लेकिन मजेदार था। सुबह-सुबह उठकर मां के साथ गोबर से आंगन लीपना, फिर मिट्टी के बर्तन में रखा ठंडा पानी पीकर स्कूल के लिए निकल जाना। स्कूल करीब 3 किलोमीटर दूर था न कोई साइकिल,...
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