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Raman Sharmaleft a comment
(Jagl aur Ser ki Kavita) जंगल में गूंजा दहाड़ का स्वर, शेर निकला था, था सब पर ड़र। पेड़ों के साए, पत्तों की सरसर, हर जानवर छुपा, थर्राया शहर। सिंह था राजा, शान थी उसकी, पर जंगल की जान थी हर किसी की। नदी, हिरन, और तोता बोलता, संतुलन से ही जंगल डोलता। शेर ने सोचा, "मैं हूं अकेला," "मेरे बिना तो है सब झमेला!" लेकिन जब आया सूखा का दिन, शेर भी समझा – साथ है जीवन की बिन। अब वो करता पहरेदारी, बिना...
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